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पीलकपुर श्योराम जामा मस्जिद में हुआ कुरान मुकम्मल, की गई दुआ

यामीन विकट

डिलारी ब्लॉक डिलारी क्षेत्र के गांव पीलकपुर श्योराम जामा मस्जिद में रमजान के पाक महीने में इक्कीसबीं तरावीह की नमाज में कुरान मुकम्मल किया गया। कुरान मुकम्मल के बाद देश में अमन और चैन के लिए दुआ की गई। माहे रमजान के बीसवें रोजे के साथ ही मगरिब की नमाज के बाद रमजान का दूसरा अशरा मगफिरत भी मुकम्मल हो गया।

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उधर नमाजे तरावीह में कुरान-ए-पाक मुकम्मल हुआ। इसके बाद तबर्रुक भी बांटा गया। रविवार रात को बाद नमाज़े ईशा इक्कीसबीं तरहवीं में गांव की जामा मस्जिद में कुरान-ए-पाक मुकम्मल हुआ। गांव की जामा मस्जिद में हाफिज मौहम्मद जफर ने कुरान पाक सुनाया और सुनने वाले (समाअत) के फराइज को बुढ़ानपुर से आये हाफिज शहवाज रजा ने सुना। कुरान-ए-पाक मुकम्मल होने के दौरान हाफिज मौहम्मद जफर ने लोगों को तकरीर के जरिए बताया कि मुसलमानों को अपनी जिंदगी में कुरान को मजबूती से पकड़े रहना चाहिए।

 

 

 

जामा मस्जिद में हाफिज मौहम्मद जफर ने अपनी तकरीर में बताया की माहे रमजान में तीन अशरे होते हैं। पहला और दूसरा अशरा दस-दस दिन का और आखिरी अशरा चांद के अनुसार नौ या दस दिन का होता है। इसके साथ ही आज रविवार को बीसवां रोजा होने पर मगरिब की नमाज के बाद दूसरा मगफिरत का अशरा मुकम्मल हो गया। तीसरा जहन्नुम की आग से निजात का अशरा भी शुरू हो गया। रमजान के आखिरी अशरे की एक अहम इबादत ऐतिकाफ है। ऐतिकाफ मतलब दुनिया से कटकर मस्जिद में एकांतवास करना जिसे महिलाएं घर पर कर सकती है। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमेशा रमजान के आखिरी अशरे में ऐतिकाफ फरमाते थे। दस दिनों के लिए मस्जिद में ही खाना पीना और सोना होता है। एतिकाफ से बस्ती का अजाब टाल दिया जाता है। ईद का चांद दिखने पर एतिकाफ खत्म होता है। जिसमे बन्दो को अल्लाह ताला की इबादत करते रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि हर मुसलमान को कलमा-ए-तय्यबा का जिक्र हर वक्त करते रहना चाहिए। जब कोई मोमिन पूरे महीने रोजा रखता है।

 

 

 

और फिर ईद की नमाज अदा कर्ता है, तो अल्लाह उस बंदे के सर से लेकर पैर तक के सारे गुनाह माफ कर दिया करता है। अल्लाह का बंदा ऐसा हो जाता है कि जैसे वह आज ही अपनी मां के पेट से पैदा हुआ है। तकरीर में उन्होंने बताया कि बहुत ही बदनसीब है, वो मोमिन बंदे, जो इस महीने की फजीलत को हासिल नहीं करते है और अल्लाह जो इस पाक मुकद्दस महीने में अपने खजाने लूटा रहा है और बदनसीब बंदे उन्हें लूटते नहीं और छोड़ दिया करते है। उन्होंने सभी मोमिनों से रोजे और नमाज को कहा।

 

 

 

इसके बाद देश में अमन और चैन और देश की तरक्की कौम की तरक्की के लिए दुआ की गई। दुआ में शरीक होने वाले हाफिज मौहम्मद जफर, हाफिज शहवाज रजा इरशाद अंसारी,सलमान, हाफिज ताहिर, डॉक्टर रफीक, नासिर हुसैन, साजिद अंसारी, जुनैद, यूसुफ अली, सहित तमाम अकीदतमंद मौजूद रहे।

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